कोरोना काल में टूट रही है कोचिंग संस्थानों की साँस

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CGP NEWS – देवेश तिवारी (बदला हुआ नाम) पिछले पाँच साल से सिविल सेवा की तैयारी कराने वाले कुछ संस्थानों में पढ़ाते हैं.

दिल्ली के अलावा वो लखनऊ, इलाहाबाद और जयपुर भी पढ़ाने जाते थे. कोचिंग संस्थानों से उन्हें हर महीने क़रीब एक लाख रुपए की आमदनी होती थी. लॉकडाउन के बाद कोचिंग संस्थान बंद चल रहे हैं और देवेश तिवारी बेरोज़गार हो गए हैं.

यह हाल अकेले देवेश तिवारी का ही नहीं, बल्कि कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले हज़ारों शिक्षकों का है, जो या तो फ़ुल टाइम या फिर पार्ट टाइम इस पेशे से जुड़े हुए हैं.

कोचिंग संस्थानों के संचालक और उनके ज़रिए रोज़गार पाए लोग भी इस समय बेकारी का दंश झेल रहे हैं और आगे भी स्थिति कुछ बेहतर होने की उन्हें उम्मीद नहीं दिख रही है.

कोरोना संकट के चलते अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र की गति मंद पड़ गई है.

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