CGP NEWS  पांडेसरा में पबजी गेम खेलने के झगड़े में 19 साल के युवक ने 11 साल के नाबालिग की गला घोंटकर हत्या कर दी है| देर रात तक नाबालिग के घर न लौटने पर परिवार वालों ने पांडेसरा थाने में अपहरण और हत्या की शिकायत दर्ज कराई। पांडेसरा पुलिस ने आशंका के आधार पर एक युवक से पूछताछ की तो राज खुला।जानकारी के अनुसार झारखंड का मूल निवासी और जीवनदीप सोसाइटी में रहने वाले अमन ने 11 साल के आकाश तिवारी की हत्या करके शव को पलंग के नीचे चादर में छिपाकर रख दिया और घर से बाहर चला गया।  अमन ने नाबालिग का चप्पल बोरी में छिपा दिया. हत्यारे का रूम पार्टनर सोनू रात में नौकरी करके वापस आया, खाना बनाकर खाने के बाद सोने के लिए पलंग के नीचे से चादर निकाली तो शव देखकर घबरा गया और पडोसियों को बुलाया।नाबालिग की मां ने बताया कि सुबह 11 बजे मैं खाना बना रही थी। आकाश नहाकर तैयार हो गया। आकाश ने कहा कि पराठा बना कर रखना दो मिनट में आता हूं। इतना कहकर चला गया। देर तक आकाश नहीं आया तो चिंता होने पर सभी लोग उसे खोजने लगे। तभी रात 11 बजे अमन के घर से आकाश का शव मिला। मां ने बताया कि लॉकडाउन में तीन महीने पहले ही हम घर बदलकर यहां रहने आए थे। मैंने कई बाद आकाश को पुराने घर की ओर से जाने से मना किया था, पर वह नहीं माना।बेटे की मौत से आहत पिता ने बताया कि अगले महीने आकाश का बर्थडे था। मैं उसे साइकिल गिफ्ट करने वाला था। मैं पांडेसरा में गुजरात हाउसिंग बोर्ड के हीरा नगर में किराए के मकान में रहता हूं और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता हूं। आरोपी बता रहा है कि पबजी गेम खेलते समय आकाश ने कॉइन ट्रांसफर कर लिया था, जबकि मेरा बेटा मोबाइल लेकर नहीं गया था। पुलिस पूछताछ में आरोपी अमन ने बताया कि आकाश पबजी गेम खेलते समय उसके मोबाइल से कॉइन ट्रांसफर कर रहा था। इसी गुस्से में गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद शव को बेड के नीचे छिपा दिया और  किसी को शक न हो इसलिए परिवार के साथ तलाश करता रहा। उसने बताया कि रूम पार्टनर के सोने के बाद रात में वह शव को ठिकाने लगाने वाला था लेकिन उसका राज खुल गया।सिविल अस्पताल के फॉरेंसिक डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. गणेश गोवेकर ने बताया कि मृतक के गुप्तांग में चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। हालांकि सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं। मृतक के साथ कुकर्म होने की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। सैंपल में पता चलेगा कि नींद की दवा या जहर दिया गया था या नहीं। शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं।

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