CGP NEWS संकरी प्लांट तैयार होने के बाद यहां खाद बनाने का काम 24 जून को शुरू हुआ था। औपचारिकताएं पूरी करने और प्लांट की क्षमता से खाद के उत्पादन में इतना समय लगा। अब रोज लगभग 30 टन खाद बनाने का प्रोसेस चलेगा। निगम अफसरों ने बताया कि पूरे शहर से रोज 500 टन कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड पहुंचता है। इसमें 300 टन गीला और 200 टन सूखा कचरा रहता है। गीले कचरे को खाद बनाने के लिए अलग किया जाता है। सूखे कचरे का कुछ हिस्सा रीसाइकिल होता है, बाकी सीमेंट संयंत्रों में भेजा जा रहा है। इस तरह, अब शहर के शत-प्रतिशत कचरे का निपटारा होने लगा है। निगम अधिकारियों ने बताया कि सकरी प्लांट में रोज बनने वाली गीले कचरे की प्राकृतिक खाद को बाजार में किसानों, आम लोगों को जल्द उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके लिए राज्य शासन के क़ृषि विभाग से फ़र्टिलाइज़र लाइसेंस लेने की प्रक्रिया ठेका कंपनी करेगी।

कचरे से खाद बनने की वजह से अब रायपुर की स्वच्छता रैंकिंग में वृद्धि की उम्मीद है। रायपुर के अब चूंकि प्लांट को ज्यादा कचरे की जरूरत होगी, इसलिए कंपनी शहर से पूरा कचरा उठाएगी।

निगम स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष नागभूषण राव ने कहा कि यह राजधानी रायपुर को स्वच्छ बनाने की दिशा में चल रहे राज्य शासन व रायपुर निगम के सतत प्रयासों को मजबूती देगा।

“शहर के कचरे से खाद तैयार होना हमारे लिए अच्छा है। अब शहर के सफाई इंतजाम और बेहतर हो सकेंगे।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here