कांवड़ यात्रा: मनोकामना पूर्ति के लिए गंगाजल से करते हैं शिव का जलाभिषेक… रेकी से गंगाजल लेकर निकली शिवभक्तों की टोली

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जय महांकाल संघ द्वारा ग्राम रेकी में आज बोल बम कांवर यात्रा निकाला गया जो कि ग्राम रेंकी लीलागर महादेव शिव मंदिर से जल लेकर पाली स्थित प्राचीन शिव मंदिर तक कांवर यात्रा जल उठाए पैदल यात्रा करेंगे।भगवान शिव का पावन महीना श्रावण का शिवलिंग को समर्पित है भगवान शिव जी को प्रशन्न करने के लिए यह महीना बहुत ही शुभ है भोलेनाथ के भक्त यूं तो सालों भर कांवड़ चढ़ाते रहते हैं लेक‌िन सावन में इसकी धूम कुछ ज्यादा ही रहती है क्योंक‌ि यह महीना है भगवान श‌िव को समर्प‌ित। और अब तो कांवड़ सावन महीने की पहचान बन चुका है। लेक‌िन बहुत कम लोग जानते हैं क‌ि श‌िव जी सबसे पहले कांवड़ क‌िसने चढ़ाया और इसकी शुरुआत कैसे हुई। कुछ कथाओं के अनुसार  भगवान परशुराम ने अपने आराध्य देव शिव के नियमित पूजन के  लिए  पूरा महादेव में मंदिर की स्थापना की और कांवड़ में गंगाजल लाकर पूजन किया। वहीं से कांवड़ यात्रा की शुरूआत हुई जो आज भी देश भर में प्रचलित है। कांवड़ यात्रा का वैज्ञानिक महत्‍व। कांवड़ यात्रा का धार्मिंक महत्व तो जगजाहिर है लेकिन इस कांवड़ यात्रा को वैज्ञानिकों ने उत्तम स्वाास्थ्य से भी जोड़ दिया है। प्रकृति के इस खूबसूरत मौसम में जब चारों तरफ हरियाली छाई रहती है तो कांवड़ यात्री भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए पैदल चलते हैं। पैदल चलने से हमारे आसपास के वातावरण की कई चीजों का सकारात्मक प्रभाव हमारे मनमस्तिष्क पर पड़ता है। चारों तरफ फैली हरियाली आंखों की रोशनी बढ़ाती है । वहीं ओस की बूँदें नंगे पैरों को ठंडक देती हैं तथा सूर्य की किरणें शरीर को रोगमुक्त बनाती हैं। कांवड़ यात्री केसर‌िया वस्‍त्र क्यों धारण करते हैं कांवड़ यात्रा लंबी तथा कठिन होती है लेकिन लक्ष्य एक ही होता है कि महादेव को जल चढ़ाना है । व्यक्ति को इस लम्बी यात्रा के दौरान आत्मनिरीक्षण करने का मौका मिलता है। इस धार्मिक यात्रा की विशेषता यह भी है कि सभी कांवड़ यात्री केसरिया रंग के वस्त्र ही धारण करते हैं। केसरिया रंग जीवन में ओज, साहस, आस्था और गतिशीलता  बढ़ाता है। कलर-थैरेपी के अनुसार यह रंग पेट की बीमारियों को दूर भगाता है। सारे कांवड़ यात्री बोल बम के सम्बोधन से एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाते हैं। ये यात्री रास्ते भर एक-दूसरे से वार्तालाप करते चलते हैं। रास्ते में छोटे-बड़े गाँव, शहरों से गुजरते हैं तो स्थानीय लोग भी इन कांवड़ यात्रियों का स्वागत करते हैं। कांवड़ यात्रा में कांवड़ के भी विभिन्न रूप होते हैं। ग्राम पंचायत रेंकी में शिवभक्तों द्वारा गंगा जल लेकर पुरातत्व शिव नगरी पाली स्थिति भगवान शिव पर गंगाजल अर्पित करेंगे जिसमे मुख्य रूप से सरपंच श्रीमति भगवती सुंदर सिंह श्रोते, और पंचायत प्रतिनिधि द्वारा विधि पूर्वक पूजन याचन कर कंधों में कांवर जल उठाकर पाली प्राचीन शिव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए रवाना किए गए जिस कांवर यात्रा में महांकाल समिति के अध्यक्ष राज कुमार पटेल ,उपाध्यक्ष चित राम पटेल सचिव सुरेश पटेल समेत 70 लोग इस यात्रा में शामिल हैं।

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