उफनता नाला पार कर गांव जाने को मजबूर ग्रामीण, पुल – पुलिया के लिए तरस रहे

रिपोर्टर रवि राठौर

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कोरबा जिले के विकासखंड करतला के अंतिम छोर में बसे ग्राम पंचायत कलगामार के आश्रित ग्राम तराईमार के ग्रामीण उफनते नाला से परेशान हैं। बरसात के मौसम में बेन्द्रों नाला में बहुत अधिक पानी आता है जिससे ग्रामीणों का संपर्क मुख्यालय से टूट जाता है। ग्रामीणों को उफनता नाला पार करके राशन और अन्य सुविधाएं लेनी होती है। पंचायत मुख्यालय और गांव के बीच यह नाला पड़ता है जो बरसात के मौसम में ग्रामीणों के लिए आवागमन में समस्या पैदा करता है। बच्चों को स्कूल और कर्मचारियों को भी कार्य में जाना पड़ता है जो पानी की तेज धार और बहाव के बीच संभव नहीं हो पाता। यह कई बार हादसों के जोखिम की वजह भी बनता है। ग्रामीणों का कहना है कई वर्षो से प्रशासन पुल बनाने का आश्वासन दे रहा है परंतु अब तक पुल की सुविधा ग्रामीणों को प्राप्त नहीं हुई है।

उफान पर बेन्द्रो नाला
इसके अलावा जिले के अनेक ग्रामीण अंचल आज भी बरसात के मौसम में टापू बन जाते हैं और नदी-नाले पर पल के अभाव में संपर्क से कट जाते हैं। जिले में कई वर्षों से अधिकारी हों या संबंधित विभाग में काम करने वाले जिम्मेदार कर्मचारी, वे समस्या से वाकिफ हैं साथ ही जनप्रतिनिधियों की भी जानकारी में उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र की उक्त समस्या को पूरी जानकारी है किंतु समाधान वर्षों से लंबित है। इन नदी-नालों पर पुल-पुलिया का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। इसी प्रकार दर्जनों गांव और उनके आश्रित मोहल्ले कीचड़ युक्त कच्ची सड़कों से छुटकारा नहीं पा सके हैं जबकि कोरबा जिला विकास के मामलों में खनिज न्यास की भारी-भरकम राशि और आकांक्षी जिलों की सूची में शामिल है। सांसद आदर्श ग्राम की योजना और परिकल्पना भी धरातल पर नहीं उतर पाई है बल्कि कागजो में काम सिमट कर रह गए हैं। ग्रामीण विकास, ग्रामीणों के उत्थान और मूलभूत सुविधाओं के लिए आने वाली विभिन्न मदों की राशि को दूसरी योजनाओं में नियम विरुद्ध खर्च कर/बंदरबाँट कर मूल कार्य को भी अवरुद्ध कर दिया जा रहा है। ऐसे में गांव और ग्रामीणजनों के समग्र विकास की बात दावापूर्वक करना बेमानी होगी।

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