CGP News : खेल के जरिए बच्चे के सीखने की प्रवृत्ति तीव्र होती है। बच्चों के विकास के लिए भी खेल महत्वपूर्ण है। खिलौने बच्चों की इंद्रियों, समस्या समाधान, कौशल विकास और सर्वांग्रीण विकास के लिए जरूरी है। कुछ यही मानना है विशेषज्ञों का। यही कारण है कि नई शिक्षा नीति में तीन साल के बच्चों की शिक्षा में खिलौने को भी जोड़ा गया है। कठपुतलियां, मिट्टी के बने बर्तन और खिलौने बच्चों की पढ़ाई के लिए पहले अध्ययन के पाठ होंगे। ये खिलौने शिक्षक स्वयं बनाएंगे।

आनलाइन खिलौने भी बनाए जाएंगे। इसमें मोबाइल, वेब एप्स, डिजिटल खिलौनों का इस्तेमाल पठन-पाठन के लिए किया जाएगा। कक्षा को रोचक बनाने और बच्चों को खेल-खेल में सिखाने के लिए यह योजना बनाई गई है। शिक्षाविदों का कहना है कि ऐसा परिवेश निर्मित किया जाएगा कि बच्चे और अभिभावक दोनों नए या पारंपरिक खिलौने और खेल बना सकें। इलेक्ट्रानिक्स खिलौनों के साथ-साथ बोर्ड गेम्स, कार्ड गेम्स, पहेलियां, भूल-भुलैया, शिल्प कला आदि के खिलौने होंगे जो कि बच्चों की पढ़ाई को रोचक बना देंगे।

शुरू हो गया खिलौना बनाने का प्रशिक्षण

केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति पर छत्तीसगढ़ में अमल होना शुरू किया गया है। शिक्षकों के साथ टाप पेडागाजी पर फोकस किए जाने का प्रस्ताव है। इसके तहत राज्य में शिक्षकों स्कूल से लेकर विभिन्न् स्तरों पर खिलौना बनाने का कार्य प्रारंभ किया है। शिक्षकों ने इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को भी जोड़कर अपने रचनात्मक कौशल को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

खिलौने ऐसे बनाए जा रहे हैं जिसमें बच्चों को मनोरंजन तरीके से विज्ञान, गणित जैसे विषयों को भी समझाया जा सके। कबाड़ से जुगाड़ करके शिक्षकों को खिलौना बनाने के लिए कहा जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से विज्ञान आश्रम द्वारा प्रति गुरुवार को खिलौना बनाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा जा रहा है।

इसलिए खिलौनों का औचित्य

नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में 10+2 ढांचे की जगह 5+3+3+4 का नया स्ट्रक्चर शामिल किया गया है। अब 5+3+3+4 में 5 का मतलब है तीन साल प्री-स्कूल, क्लास एक और दो । अगले तीन का मतलब है क्लास 3, 4 और 5। उसके बाद के तीन का मतलब है क्लास 6, 7 और 8। आखिर के 4 का मतलब है क्लास 9, 10, 11 और 12। विशेषज्ञों का कहना है कि कक्षा तीन के बच्चों को शिक्षा के प्रति जोड़ने के लिए खिलौनों का अपना महत्व होगा। वे इसकी ओर आकर्षित होंगे और पठन-पाठन में उनका मन लगेगा।

फैक्ट फाइल

– 56 हजार 727 कुल स्कूल प्रदेशभर में संचालित

– 2689 हाई स्कूल और 4331 हायर सेकेंडरी स्कूल

– 33,257 प्राइमरी और 16,450 मिडिल स्कूल प्रदेश में संचालित

– 60 लाख बच्चे स्कूलों में अध्ययनरत

प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. आलोक शुक्ला ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए खिलौने की उपयोगिता पर फोकस किया गया है। कक्षा को अधिक स्र्चिकर बनाने के लिए हम खेल के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक और बच्चे दोनों को ही खिलौना बनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

 

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