बिलासपुर जिले की जिला सहायक आबकारी अधिकारी कल्पना राठौर डंके की चोट पर खुद को सबसे बड़ा गुंडा और सबसे बड़ा पुलिस बता गई….

गुरबक्श संधू

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बिलासपुर कल्पना राठौर द्वारा किये गए इस कृत्य के लिए भूपेश सरकार को विशेष तौर पर बधाई…क्योकिं अब तक कांग्रेस के लोग ही गुंडागर्दी का डंका पीट रहे थे,लेकिन अब उनके अधिकारी भी डंका पीटने लग गए..!

 

अवैध शराब का कारोबार भूपेश-सरकार के संरक्षण में कैसे फल-फूल रहा है इसका साक्षात उदाहरण है ये ताजा घटनाक्रम….

जिला सहायक आबकारी अधिकारी कल्पना राठौर अवैध शराब की छापेमारी करने रतनपुर क्षेत्र जाती है…अपने साथ पुलिस को ले जाना चाहिए लेकिन वो अपने साथ संविदा कर्मचारियों को लेके जाती है…

छापेमार कारवाही में क्या सांठगांठ हुई ये तो आबकारी विभाग जाने लेकिन इस कार्यवाही के बाद कल्पना राठौर ने अपने साथ ले गए संविदा कर्मचारियों को घटना-स्थल पर ही छोड़ के खुद वहां से भाग गई…

इनके भागने के बाद अवैध शराब के कारोबारियों ने उन संविदा कर्मचारियों की पिटाई कर दी, जिसमें एक कर्मचारी का सिर फट गया….

और जब घायल कर्मचारी के परिजन ने मारपीट करने वालों के विरुद्ध थाने चल के FIR दर्ज करवाने के लिए कल्पना मैडम को बोला तो वो “सबसे बड़ा गुंडा” वाला डायलॉग मार के वहां से निकल गई….

आबाकरी विभाग के इस बेरुखी के बाद घायल कर्मचारी के परिजनों ने थाने जाके FIR दर्ज करवाई…जो काम शासन का था उसे कर्मचारी के परिजनों को करना पड़ा..!

 

तो अब सवाल उठता है…

आखिर अपने कर्मचारी के लिए FIR करवाने में कल्पना मैडम को दिक्कत क्या थी..?

क्या इसका कारण अवैध शराब कारोबारियों से सांठगांठ है..??

 

इन सवालों का जवाब भूपेश सरकार से मिल पाना संभव नहीं है…क्योकिं गली-गली में कुकुरमुत्ते की तरह उग आए अवैध शराब कारोबारीयों का बिना सरकारी संरक्षण के पनप पाना संभव नहीं था…

और भूपेश सरकार पर ये सीधा आरोप हम इसलिए लगा रहें हैं क्योकिं अवैध शराब कारोबारियों पर FIR दर्ज करवाने की सजा संविदा कर्मचारी को मिल चुकी है…उसे नौकरी पर वापस नहीं आने का फरमान सुनाया जा चुका है..!

 

अंत मे इतना ही बोलूंगा….

“शराबबंदी का वादा करने वाली सरकार, आज उस शराब पर ही अपना मान-ईमान न्योछावर कर

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