ग्राम पंचायत सचिव ने पंचायत भवन के बाहर घंटों जिला अधिकारियों को प्रतीक्षा कराया और उनसे मिले भी नहीं, मामला सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत मंजीरा का है

मनीष अंबस्ट

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सुरजपुर/- बड़े बड़े अधिकारियों से मिलने कभी ना कभी आप सभी ने उनके चेंबर के बाहर प्रतीक्षा की होगी लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि ग्राम पंचायत सचिव ने पंचायत भवन के बाहर घंटों जिला अधिकारियों को प्रतीक्षा कराया और उनसे मिले भी नहीं, मामला सूरजपुर जिले के ग्राम पंचायत मंजीरा का है, गांव में किए गए विभिन्न विकास कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायत ग्राम वासियों द्वारा लगातार की जा रही थी जिसके फलस्वरूप जिला प्रशासन ने जांच दल का गठन कर गांव में भेजा लेकिन भ्रष्ट सचिव जिनकी सेटिंग्स ऊपर तक है उन्हें अधिकारियों के आने की सूचना मिली तो वे पंचायत भवन में आधा किलो का ताला लटका कर भाग निकले। जांच दल जब गांव में पहुंची तो पंचायत भवन में लटका ताला देखकर वह भी सन्न रह गए, सचिव से संपर्क करने का प्रयास भी किया पर नही हो सका। जांच दल के समक्ष उपस्थित ग्राम वासियों ने बताया कि गांव के सरपंच सचिव और रोजगार सहायक ने गांव में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किए हैं । मनरेगा के तहत हुए निर्माण कार्यों में फर्जी मस्टररोल भरकर बड़ी राशि का बंदरबांट कर लिया है, वही कई ऐसे कार्यो की राशि भी आहरित कर ली गई है जो अपूर्ण है या हुए ही नही, पंचायत भवन के फर्नीचर खरीदी हेतु भी राशि निकाली गई जो शायद अब इनके घर की शोभा बढ़ा रहे है। पंचायत भवन के बंद रहने और सचिव की अनुपस्थिति से जांच दल को भी निराश होकर लौटना पड़ा।शिकायतकर्ता धन कुमार पैकरा ने सरपंच सचिव पर आरोप लगाते हुए कहां की इनके गठबंधन से गांव में भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पार हो चुकी है, मनरेगा के तहत हुए डबरी निर्माण में ऐसे हितग्राहियों का भी नाम है जो शासकीय सेवक हैं साथ ही ऐसे भी हितग्राही हैं जो गांव में रहते ही नहीं कुछ तो ऐसे है जो सम्पन्न परिवार से है और उन्हें कार्य करने की आवश्यकता ही नही। गांव के सीसी रोड निर्माण कार्य में भी बड़ा घपला हुआ है एक ही निर्माण कार्य को दिखा कर दो दो बार राशि आहरित कर ली गई है और फर्नीचर खरीदी भी सिर्फ कागजों में हुआ है। पंचायत भवन के समक्ष उपस्थित एक अन्य पंच ने नाम उजागर न करने की शर्त पर तो यहाँ तक कह दिया कि जांच दल का गठन सिर्फ दिखावे के लिए किया गया है, क्योंकि जांच दल के आने की सूचना किसी भी पंच को नहीं थी, जो भी मौके पर उपस्थित हैं वह अप्रत्याशित है, कहीं सरपंच-सचिव ने जांच दल से भी तो सेटिंग नहीं कर रखी तभी तो इनके आने की सूचना तक किसी को नही मिली।

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