शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आज से शुरू, भक्तों के लिए चैतुरगढ स्थित मां महिषासुर मर्दिनी दर्शन की डगर हुई कठिन, भारी बारिश से मार्ग में निर्मित पुल व रैम्प हुआ

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पाली:-आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि यानी आज से शारदीय नवरात्रि पर्व की शुरुआत हो चुकी है। जिसमें पूरे 9 दिनों तक विराजमान मां जगत जननी के दिव्य रूपों की उपासना होती है। देवी मंदिरों में भी ज्योत प्रज्ज्वलित हो गए है। हालांकि इस वर्ष नवरात्रि का पर्व महज 8 दिन तक ही चलेगा, जो आज से शुरू होकर 14 अक्टूबर को समाप्त हो जाएंगे। शरद ऋतु में पड़ने वाली नवरात्रि को मुख्य नवरात्र माना जाता है। नवरात्रि के इस त्योहार में कुछ लोग अपने घरों में माता की चौकी लगाकर अखंड ज्योत भी जलाते हैं। जिससे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही देवी मंदिरों में विराजमान माता के दर्शन का दौर भी नवरात्रि पर्व के दौरान चलता है, लेकिन प्रसिद्ध स्थल व छत्तीसगढ़ का कश्मीर कहे जाने वाले प्राकृतिक सौंदर्य एवं हरीतिमा लिए पहाड़ी वादियों के बीच पर्यटन एवं आस्था का केंद्र चैतुरगढ में विराजमान मां महिषासुर मर्दिनी के दर्शन की डगर बीते भारी बारिश के कारण वर्तमान में कठिन हो चुकी है। जहां भक्तों को माता के दर्शन हेतु मंदिर तक पहुँचने में इस बार खासी मशक्कत करनी पड़ेगी, क्योंकि बरसात की वजह से इस मार्ग में पड़ने वाले अनेक पुल क्षतिग्रस्त हो चुके है तो वही मंदिर तक जाने लगभग 3060 फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी पर बने रैम्प भी बुरी तरह से ध्वस्त हो चुका है जो खतरनाक साबित हो रहा है। ऐसे हालात में मंदिर तक दोपहिया- चारपहिया वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है, साथ ही मंदिर तक पैदल पहुँचने के दौरान एहतियात बरतने की सूचना बोर्ड लगा दी गई है। तथा इस बार मातारानी दरबार के अलावा यहां अन्य दीप प्रज्ज्वलित नही किये गए है। क्षतिग्रस्त हुए पुल व रैम्प के आवश्यक मरम्मत कार्य हेतु जिला प्रशासन द्वारा नवरात्रि पूर्व ध्यान नही दिया जा सका। जिसके कारण इस बार चैतुरगढ की डगर कठिन हो चुकी है। हालाकि वन विभाग द्वारा मरम्मत कराए जाने को लेकर कार्ययोजना शासन को भेजी गई है किंतु उसकी भी स्वीकृति अभी तक नही मिल पाना बताया जा रहा है। दूसरी ओर पुरातत्व विभाग की ओर से भी मरम्मत कार्य को लेकर कोई जवाब नही मिल पाया है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ का यह प्रसिद्ध स्थल कोरबा जिला मुख्यालय से कटघोरा, पाली होते हुए करीब 90 किलोमीटर की दूरी पर मैकाल पर्वत श्रेणी की ऊँचाई में स्थित है। जो उच्चतम चोटियों में से एक है। चैतुरगढ का क्षेत्र अलौकिक, शंकर एवं गुप्त गुफा, झरना, नदी, जलाशय, जंगली जीव- जंतुओं से परिपूर्ण है। जहां का तापमान ग्रीष्म ऋतु में भी 30 डिग्री सेंटीग्रेट से अधिक नही होता है। इसीलिए इसे छत्तीसगढ़ का कश्मीर कहा जाता है। जहां अनुपम छटाओं से युक्त यह दर्शनिक क्षेत्र अत्यम दुर्गम है। जहां राजा पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा प्राचीन काल से निर्मित यहां मंदिर के गर्भगृह में मां महिषासुर मर्दिनी की दिव्य मूर्ति विराजमान है, जो साधना, शक्ति व आराधना का केंद्र रहा है। जहां नवरात्र में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है तथा दर्शन हेतु भक्तों की कतार लगी रहती है। किंतु इस नवरात्रि मार्ग में निर्मित पुलों एवं मंदिर तक जाने रैम्प के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण भक्तों को माता के दर्शन में कठिनाई झेलनी पड़ेगी।

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